Saturday, 29 March 2025

खोखर और इतिहास

 खोखर राठौड़ वंश, राठौड़ राजपूतों की एक प्रतिष्ठित शाखा है, जिसकी उत्पत्ति राव छाड़ा के पुत्र राव खोखर से मानी जाती है। राव खोखर ने राजस्थान के बाड़मेर जिले में सांकड़ा, सनावड़ा आदि गांवों पर अधिकार स्थापित किया और 'खोखर' नामक गांव की स्थापना की।



जब अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाना पर आक्रमण किया, तब राव खोखर ने सांतल दे के पक्ष में वीरता से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए।

वर्तमान में, खोखर राठौड़ वंश के वंशज मुख्यतः राजस्थान के बाड़मेर जिले के विभिन्न गांवों में निवास करते हैं। इनका इतिहास और संस्कृति राजस्थान की समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा है।

यदि आप खोखर राठौड़ वंश के इतिहास पर और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित वीडियो सहायक हो सकता है:

कांकरिया कोठा निंबली में नागणेच्या माताजी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा

 आप सभी राजपूत सरदारों के साथ साथ सभी धर्मों और जातियों के भक्तों का मां नागणेच्या माताजी के 27,000 बीघा विशाल ओरण की धनियानी के नव निर्मित और जीर्णोद्वार मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा के साथ साथ विशाल जागरण और परसादी राखी गई हैं। 

अतः सभी भक्तों को इस आयोजन में अवश्य पधारना हैं। मां का बुलावा होगा तो मैं भी पहुंचने की पूरी कोशिश रहेगी। 




खोखर राठौड़ राजपूत

खोखर राठौड़ राजपूत जानकारी ब्लॉग पर आपका स्वागत हैं। राठौड़ राजपूतों में 1327 में राव छाडाजी के पुत्र थे। इतिहास में खोखर जी के बारे में काफी कुछ दर्ज हैं। इस ब्लॉग पर आप खोखर राठौड़ नख के बारे में ऐतिहासिक जानकारियां जिसमे इतिहास के पन्नों में छपे और भारत व प्रवासी खोखर राठौड़ भाईयों के द्वारा प्रदान की जाने वाली वास्तविक एतिहासिक और सामाजिक कार्यक्रमों,आयोजनों,धार्मिक और सामाजिक रीतियों व पुरखों द्वारा मनाए जाने वाले तीज और त्योहार और सबकुछ इस ब्लॉग पर पढ़ और जान सकेंगे।